Author: Awadhesh Kumar Rai

बनारस घाट पर एक ‘अद्भुत’ कविता By अवधेश कुमार राय

आज फिर मौत का जिंदगी से जश्न हो गया है. सारी रात जलती रही चिंगारी लहरों से रस्क़ हो गया है. सुलगती रही एक खामोश जिंदगी पूरी रात
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रुठ जाता हूं मैं खुद से अक्सर Famous Urdu Sher of Tanhai Shayari

रुठ जाता हूं मैं खुद से अक्सर. महफिलों में घुली तनहाइयां अक्सर. मंजर फिका- फिका कुछ दास हमसे. महफिलों में घुली रुसवाइयां अक्सर. मुझे पता तेरा आना एक
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