” बेबस जिंदगी “- Bebas Si Zindagi Hindi Sad Poetry

(बेबस जिंदगी )

अपनी किस्मत से मात खाती हूँ
मैं जीत के भी हार जाती हूँ ,
मेरे आंसू समेट लेंगे वो
खुद को अक्सर यूं ही बहलाती हूँ ,
जान कर भी क्यों अनजान बन जाते है हम
एक के बाद एक और क्यों गुनाह किये जाते हैं हम ,
मालूम है जब मिट जायेगी ये हस्ती हमारी
फिर भी क्यों खुद को बर्बाद किये जाते हैं हम ,
हैं हाथ अपने खाली और दुआयें बेसर
फिर भी क्यों लोगों के एहसान लिये जाते हैं हम ,
सूख चुका है हमारी जिंदगी के उम्मीदों का पेड़
फिर क्यों अब तक पानी दिये जाते हैं हम ,
ओढ़ लिया है जिंदगी ने हमारी गमों का कफन
जीने की नहीं तमन्ना फिर भी क्यों जिये जा रहे हैं हम ,
टूट रहा है अब मेरी सांसों से मेरा वास्ता
फिर भी ना जाने क्यों तेरी उम्मीद किये जाते हैं हम .

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