Category: कविताएँ

बनारस घाट पर एक ‘अद्भुत’ कविता By अवधेश कुमार राय

आज फिर मौत का जिंदगी से जश्न हो गया है. सारी रात जलती रही चिंगारी लहरों से रस्क़ हो गया है. सुलगती रही एक खामोश जिंदगी पूरी रात
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रुठ जाता हूं मैं खुद से अक्सर Famous Urdu Sher of Tanhai Shayari

रुठ जाता हूं मैं खुद से अक्सर. महफिलों में घुली तनहाइयां अक्सर. मंजर फिका- फिका कुछ दास हमसे. महफिलों में घुली रुसवाइयां अक्सर. मुझे पता तेरा आना एक
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कब कहा मैंने ज़माना चाहता हूँ Hindi Ghazal By Imran Pathan

कब कहा मैंने ज़माना चाहता हूँ.. होठों पर तेरा फ़साना चाहता हूँ.. ज़िन्दगी तन्हा गुज़रती जा रही है.. तुझसे अब मैं दिल लगाना चाहता हूँ.. टूट जाते हैं
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The Beautiful Love Poem Written By Imran Pathan

लिखता हूँ मैं जब भी कुछ!! वो पल मेरे सबसे ख़ूबसूरत होते है.. जिनमें सिर्फ तुम्हारा ज़िक्र होता है । महसूस कर सकता हूँ मैं तुम्हारी सांसो को
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