नारी की भूमिका-

नारी की भूमिका-

हम सभी को प्रकृति ने बनाया है | प्रकृति ही हमको चलाती भी है अत: प्रकृति के स्वरूप की जानकारी एव उसके साथ तारतम्य का होना सुखी जीवन की पहली आवश्यकता है | प्रकृति में दो तत्व होते है – पदार्थ और ऊर्जा | पदार्थ को हम ब्रह्रा  कहते है | ऊर्जा को माया के नाम से जानते है ब्रह्रा में स्थायी भाव है | माया गतिमान तत्व है | माया को ही ब्रह्रा  की शक्ति कहा जाता है | कार्य लक्ष्मी करती है , नाम विष्णु का | सृष्टी विस्तार सरस्वती करती है ,नाम ब्रह्रा का | शक्ति ही नर भाव की पूर्णता है | पुरुष तो दोनों है | स्त्री भी पुरुष है |   मानव रूप में तो नर और नारी दोनों में ही गुण रहते है | नर में स्त्री भाव ,नारी में नर भाव भी होता है | यही हमारी अर्धनारीश्वर की अवधारणा है |

हमारे जीने के दो धरातल होते है | एक तो प्राकृतिक धरातल और दूसरा सांसारिक धरातल | प्राकृतिक धरातल से आत्मा का जुडाव रहता है | यह मरता भी नहीं है और जन्म भी नहीं लेता सांसारिक धरातल शरीर ,मन और बुद्धि से जुड़ा रहता है | ये माता –पिता से प्राप्त होते है | शरीर का नर और नारी रूप का भेद रहता है ,सृष्टी विकास के कारण | मन .बुद्धि एक जैसे ही कार्य करते है |किन्तु कार्य भेद अवश्य रहता है | स्वभाव भेद भी रहता है |

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प्रकृति रूप – स्त्री गतिशील है | स्त्री ही प्रकृति रूप में पुरुष के साथ जीवन चलाती है | नर नहीं चला सकता | किसी भी परिवार को देख ले ,घर गृहस्थी की सारी गतिविधिया स्त्री के हाथ में रहती है | वही केंद्र है | उसी की माया भाव भीतर की शक्तियां ही अधिक काम करती है | जन्म से ही स्त्री अधिक समझदार एवं चतुर होती है | उसको देव गुरु बृहस्पति और असुर गुरु शुक्राचार्य की नीतियों समझ में आती है | अटल उसकी भाषा भी परोक्ष ही अधिक होती है | संकेतो से भी काम चला लेती है | बच्चे के रोने में भेद को समझ सकती है |

स्त्री जीवन के दो विशेष पहलु है  – पत्नी और माँ के रूप में | उसका पत्नी रूप सृष्टी से जुड़ा रहता है | पुरुष शरीर में सात पुरुष पीढियों के अंश रहते है | स्त्री शरीर में भी सात स्त्री पीढियों के अंश विधमान रहते है | पत्नी – पति पहले सृष्टी विकास करते है | बाद में स्वयं मोक्ष की तैयारियां करते है | वानप्रस्थ और सन्यास आश्रमों में |

बिना पत्नी के पति को मोक्ष मिल पाना लगभग असंभव ही है | पत्नी ही पुरुष के पौरुष को जागृत करती है ,कामना बनकर | उसमे मिठास भरती है | वरना वह तो उष्ण है |

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