महिला दिवस पर विशेष लेख – कन्या भ्रूण हत्या

कन्या भ्रूणहत्या का अभिशाप मिटा सकते है हम और आप –

8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पुरे विश्व में महिलाओ को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है , क्या हम सभी वाकई महिलाओ का सम्मान करते है तो फिर आज महिलाएं की संख्या क्यों घट रही है ? हमे इस विषय पर ध्यान देना होगा अगर कन्या भ्रूण हत्या इस देश में यु ही होती रही तो एक दिन हमारे समाज में सिर्फ पुरुष ही देखने को मिलेंगे |

ब्रह्मा और शक्ति , प्रकृति और पुरुष तथा नर और मादा का मिलन व् संतुलन अनन्त काल से पृथ्वी के सभी जीवो वनस्पति और समस्त चराचर में दिखाई देता रहा है | ऐसे में आज मनुष्य ने अपनी बौद्धिक फितरत से प्रकृति के सरस सहज क्रिया कलापों के साथ बड़ी आत्मघाती छेड़छाड़ कर रखी है – इनमे क्लोन मेकिंग ,समलैंगिक यौन सम्बन्ध ,अविवाहित किन्तु पति पत्नी के रूप में रहे जोड़े ,अनावश्यक यौन परिवर्तन कराने जैसी सामाजिक बीमारिया पश्चिम जगत की सभ्यता से हमारे यहाँ आयातित हुई | लेकिन पुरुषो के मुकाबले महिला जनसंख्या के अनुपात में गिरावट के लिए हम और हमारी सोच ही दोषी है |

knaya bhrun hatya
photo credit https://www.patrika.com

पुरुष प्रधान समाज की अहंकारी धारणा ,वंश चलाने और पुत्र द्वरा पिंड दान की गलत मान्यता तो इसके कारण रहे है ,साथ ही दहेज हत्या और उत्पीडन ,महिलाओ के प्रति यौन अपराध और उतराधिकार कानून में बेटी को सम्पति में बराबर हिस्सा दिए जाने से जिस अमानवीय अपराध का जन्म हुआ जो आज भी निर्बाध रूप से जारी है , वह है – कन्या भ्रूणहत्या का अपराध |

ये भी पढ़े –  एक स्त्री ही पुरुष को मोक्ष दिला सकती है जानिए कैसे ? 

कन्या भ्रूणहत्या वृति से आज हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्र से अधिक शहरी क्षेत्र अभिशप्त है | एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में शहरी क्षेत्रो में १०००  हजार पुरुषो के अनुपात में महिलाओ की जनसंख्या केवल ९०० है ,जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या ९४६ है | गत १०० सालो से इस लिंग अनुपात की स्थिति अधिक चिंताजनक है |

आकडे बतलाते है की वर्ष १९०१ में जहाँ १००० पुरुषो के मुकाबले ९७२ महिलाए थी ,वही २००१ में महिलाए की संख्या घटकर ९३३ रह गई | लिंग अनुपात की सबसे अच्छी स्थिति केरल और पांडिचेरी में है जहाँ पुरुषो से अधिक महिलाएं की संख्या है | दुःख की बात है की सबसे ख़राब स्थिति देश के सुंदर वार्ड के शहर चंडीगढ़ और दीव  दमन की है , जहां १००० पुरुषो के अनुपात में महिलाए केवल ८०० है |

शहरी क्षेत्र में गर्भ परिक्षण से लिंग का पता लगाने की अत्याधुनिक सेवाए उपलब्ध होने से कन्या भ्रूणहत्या की घटनाए ज्यादा होने लगी है | अल्ट्रा सोनोग्राफी आदि से भ्रूण के लिंग की सुचना देना गंभीर क़ानूनी अपराध है | अधिकतर प्राइवेट नर्सिंग होम में यह अवेध धंधा सरकारी उदासीनता या मिलीभगत के कारण निर्बाध रूप से जारी है | अवैध गर्भपात के संबध में धाराए ३१२ से २१७ आई . पी .सी . के अंतर्गत सात वर्ष से उम्र कैद तक की सजा का कानून सरकार तथा पुलिस की इच्छा शक्ति एवं इमानदारी के अभाव में इन अपराधो पर काबू पाया जाना संभव नहीं है |

ये भी पढ़े – नारी की भूमिका 

अनेक लोग पहले तो कन्या भ्रूण का पता चलते ही गर्भपात कराकर उससे छुटकारा पा लेते है | कई बार यदि पूरी अवधि के बाद कन्या भ्रूण का जन्म हो भी गया तो किसी तरह से उसे ठिकाने लगाने की व्यवस्था कर ली जाती है | नवजात कन्या शिशु के नाक पर नमक या राख की पोटली रखकर उसका दम घोट दिया जाता है | अत्यधिक अफीम देकर या फिर गला घोंटकर उसे किसी निर्जन स्थान या कचरे के ढेर में या किसी सूखे कुँए में डाल दिया जाता है |

बाड़मेर में सब्जी मंडी के पास स्थित ” बाईयो के कुँए ”  के नाम से एक सूखे कुँए में ना जाने कितने ही कन्या भ्रूण के शव दफन है | अमानवीयता और बेशर्मी की हद तो तब हो जाती है ,जब हम उदयपुर की सुंदर झीलों में कमल के फूलो की जगह कन्या भ्रूण शव तेरते देखते है | यदि शीघ्र ही हमने अपनी सोच और इस कुत्सित वृति को नहीं बदला तो इन कन्या भ्रूण मृतात्माओ की बद्दुआओं से हमारा समाज बर्बाद हो जायेगा |

Sharing is caring!

Loading...

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!