रुहों का मिलन- Divine Love Hindi Poetry

रुहों का मिलन

दो रुह यूँ घुल – मिल जाएँ ,
जैसे दिन- रात मिलें ,
तो साँझ बन जाए ,
ख्यालों में यूँ खो जाएँ ,
कि अक्स अपना देखें ,
और दूजा नज़र आ जाए ,
रंग -रुप सब सिमट कर ,
एहसासों में शेष रह जाए ,
मुमकिन है ऐसे रुह धरा,
पर फिर से आएँ ,
जमाना उन्हें समझ न पाए ,
ईंटे-पत्थर बरसाए ,
लैला-मजनू नाम दे जाए ,
ऐसी तृष्णा दीवानगी की,
जो ईन्सान को खुदा,
बना जाए काश,
किसी जन्म में मुझे आजमाए ।।

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