इतनी रोई हैं आँखें के आँसू बहाना मुझे अब याद नहीं रहता ! हिंदी ग़ज़ल

इतनी रोई हैं आँखें के आँसू बहाना
मुझे अब याद नहीं रहता,
आँखों में ख़ुशी के मोती पिरोना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

यूँ टूट कर बिखरी है कितनी तमन्नाएं,
के इन ख़्वाइशों को सजाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

मेरी नाकामी पे वक़्त भी मुस्कुराता है बहुत,
इस वक़्त पे कभी मुस्कुराना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

तन्हा मुझे देख जब चाँद भी छत पे आता है,
उससे रात रात भर तेरी बातें बनाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

गिर जाता हूँ जब मैं ठोकरें खाकर ज़माने की,
खुद को कोई दिलासा दिलाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

जब भी दोस्ती में कभी झुक के आँसू बहाता हूँ
तो खुद को ही समझाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

दर्द ओ ग़म इतने सौगात में मिले हैं के,
किसी ख़ुशी को अब गले लगाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

तु ही बता मुझे ऐ ज़िन्दगी खता मेरी,
किसी की क्या खता है ये बताना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

अब इतने ना खुदा तेरे जहान में मिले हैं हमें,
के वो सचमुच के खुदा के आगे सर झुकाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

पहरों पहर जहाँ कभी हुआ करती थी बातें उससे,
वो खूबसूरत सा ठिकाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

टूट कर कुछ इस क़दर बिखरा के,
किसी से अब मिलना मिलाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

जब से वो आँगन का शज्जर उदास हुआ है,
उन खूबसूरत परिन्दों से बातें बनाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

कभी उसपे अपनी नज़में लिखकर,
कभी उस पर ग़ज़लें लिखकर उसे मनाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

माँ भी मेरे ग़म को सहन जाने कैसे करती है,
माँ के लिये ऐ खुदा तेरे बाज़ार से कुछ लाना,
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

बहुत माँगता हूँ खुदा से सबके लिये कुछ ना कुछ,
बस अपने लिये झोली फ़ैलाना
मुझे अब याद नहीं रहता ॥

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One comment

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