जीवन के जज्बात Poem by Sonam Prajapati

न जाने कहाँ खो गए हैं
बचपन के वो एहसास,
कितनी दूर हो गए हैं
अपनों के हर साथ,
जिस प्यार के साये में सीखा था
जीने का अंदाज,
उसी को छोड़ कर उड़ गए हैं
सपनों के परवाज,
अपनी हसरतों का मुकाम पाने को
बेताब हैं अपना नया आशियाँ बनाने को,
क्या पता क्या मंजिल होगी
इन अधूरी राहों से गुजरने वालों की,
अपनों के प्यार बिना कैसे महकेगी बगिया
इनके नये आशियानों की,
जमाने की शोहरत ने भुला दी है
अपनों की सच्ची दौलत को,
सिर्फ पाने की हसरत ने मिटा दी है
कुर्बानी की हर रौनक को,
न जाने कैसे जी रहे हैं
जीवन के ये जज्बात,
कितने आँसू पी रहे हैं
आँखों के हर ख्वाब ।

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