जुस्तुजू जिस की थी उस को न पाया हम ने – ग़ज़ल

जुस्तुजू जिस की थी उस को न पाया हम ने

जुस्तुजू जिस की थी उस को न पाया हम ने

इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने

सब का अहवाल वही है जो हमारा है आज

ये अलग बात की शिकवा किया तन्हा हम ने

खुद पशीमान हुए ने उसे शर्मिदा किया

इश्क की वजह को क्या क्या खूब निभाया हमने

कौन सा कहर ये आँखों प्र हुआ है नाजिल

एक मुदत से कोई ख्याब न देखा हम ने

उम्र भर सच ही कहा सच के सिवा कुछ न कहा

अज्र क्या इस का मिलेगा ये न सोचा हम ने

Sharing is caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *