खामोशी में एहसास-ए-कारवाँ- हिंदी ग़ज़ल

खामोशी

खामोशी में एहसास-ए-कारवाँ,
छुपा होता है,
खामोश निगाहों में दिल-दीवाना,
छुपा होता है,
खामोश अरमानों में दर्द पुराना,
छुपा होता है,
खामोश काली घटाओं में,
बादल-बिजली का अफसाना,
छुपा होता है,
खामोशी गर दूर तक साथ निभाए,
तो समझों दास्ताँ-ए-राज़ गहरा है,
सताए,समाज के हथकंडों का,
समय पर गहरा पहरा है जमाए,
खामोश हों राहें, तो आहें दे रहीं सदाएँ,

खामोशी अपने राज़ खुद बयाँ करती है,
खामोशी दर्द-ए-दिल की दुआ अदा करती है,
खामोशी में एहसास-ए-कारवाँ रहा करती है

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