जाने !! 7 कारण भारत में कुपोषण होने का

      कुपोषण और अस्वस्थता

कुपोषण का अर्थ है व्यक्ति को उचित मात्रा में भोजन नही मिल पाना अथवा उसके आहार में किसी पोषक तत्व की कमी होना ,जिसके कारण उसके स्वास्थ्य में गिरावट आ जाती है | प्रोटीन और कैलोरी की कमी के कारण से भारत एवं एशिया ,अफ्रीका जैसे देशो में लोग कुपोषण का शिकार हो जाते है |

भारत में कुपोषण के क्या – क्या कारण है ?

  • गरीबी
  • जनसंख्या वृधि
  • कम उपज
  • भोजन का समान वितरण
  • शिक्षा का अभाव
  • अज्ञानता
  • और खान –पान की गलत आदते और धारणाओं भी कुपोषण के लिए उतरदायित्व है |

जैसा की हम सभी जानते है की दुनिया में जनसंख्या और गरीबी असमान रूप से फ़ैली हुई है , विकसित देशो में , जैसे अमेरिका , कनाडा ,रूस ,आस्ट्रेलिया आदि देशो में जनसंख्या कम है और रहन सहन का स्तर ऊँचा है | परन्तु इसके विपरीत एशिया ,अफ्रीका और लेटिन अमेरिका के विकासशील देशो में दुनिया की ७० % लोग निवास करती है परन्तु रहन सहन का स्तर निम्न है | दुनिया की लगभग ३/४ कुपोषित जनता भारतीय उपमहाद्वीप में रहती है |

दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशो में भारत का दूसरा स्थान है | वर्ष २०१६ के आकड़ो के अनुसार भारत की जनसंख्या 1.324 billion (2016) है , बढती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की मांग भी बढ़ रही है | भारत में कुपोषित लोगो की संख्या ( जिसमे पुरुष ,स्त्रियाँ और बच्चो की संख्या ) लगभग ३० करोड़ है | हमें उत्पादन के साथ –साथ उपभोक्ताओ की खरीदने की क्षमता को भी बढ़ाना चाहिए | लोगो के पास अच्छा भोजन खरीदने के लिए पैसा होना चाहिए | तात्पर्य यह है की सरकार को बेरोजगारी को खत्म करने के लिए अधिक से अधिक नौकरिया और अधिक वेतन की व्यवस्था करनी होगी |

सामाजिक स्तर पर हमे भोजन को बर्बाद नहीं करना चाहिए , आपने देखा होगा की बड़े –बड़े प्रीतिभोज में चाहे वह बड़े गराने के लोग हो या साधारण व्यक्तियो के यहाँ ,काफी खाना बर्बाद करते है | इसके अलावा हमें आवश्कता से अधिक भोजन नही करना चाहिए |

कुपोषण से होने वाली बीमारिया –

विकाशील देशो में प्रोटीन की कमी से होने वाले कुपोषण की समस्या गंभीर है | गरीब और अशिक्षित परिवारों के बच्चे ही कुपोषण के सर्वाधिक ग्रस्त है | प्रोटीन और केलोरी की कमी में कुपोषण से होने वाली दो गंभीर बिमारिया है – क्वाश्योरकर और सुखा रोग |

प्रतिवर्ष करोड़ो बच्चे इन बीमारियों के कारण मौत के मुँह में चले जाते है | इन रोगों से बच्चो का शारीरिक विकास रुक जाता है और कमजोर हो जाता है | अत्यधिक कुपोषण का बच्चो के मष्तिस्क पर प्रभाव पड़ता है | जिसके कारण वे मंदबुद्धि के रह जाते है ओर पूर्ण रूप से विकसित नही हो पाते |

क्वाश्योरकर और सुखा रोग

क्वाश्योरकर-  क्वाश्योरकर  यह एक बाल रोग है , इस रोग का पता सबसे पहले अफ्रीका में १९३५ में लगा था | माँ का पोषक दूध बच्चे को नही मिल पाने के कारण ही क्वाश्योरकर रोग से ग्रस्त हो जाता है |

सुखा रोग – यह रोग आहार में प्रोटीन व् केलोरी की कमी के कारण होता है १ से ५ वर्ष के बच्चो में पोषण सर्वेक्षण से पता चला की कम आयु वाले वर्ग के ९०% से भी अधिक बच्चो को आवश्यक प्रोटीन व् केलोरी नही मिलती है जिसके कारण वे सुखा रोग के शिकार हो जाते है | लौह तत्व की कमी से खून की कमी हो जाती है और विटामिन ए की कमी से आँखों को रोशनी कम हो जाती है

निष्कर्ष –  कुपोषण को रोकने के लिए आवश्यक है की देश के बच्चो को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और केलोरी मिले

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