भीतर तो देखो -ओशो

भीतर तो देखो

osho hindi

भगवान कैसे मिलेगा ? आदमी से मिलना नहीं हो पा रहा है , बस इतनी सी बात है इसलिए तो बुध्द ने ईश्वर को हटा लिया और कहा – इस ईश्वर को हटा ले ने से लाभ होगा , हानि तो कुछ भी नहीं और भीतर ईश्वर को प्रतिष्ठित किया | तुम्हारा मंदिर अगर तुम्हारे भीतर हो ,तो लड़ाई –झगड़े पैदा नहीं होंगे | तुम्हारा मंदिर अगर बाहर बना , तो मज्जिद से अलग हो जाएगा| लड़ाई –झगड़े शुरू हो जायेंगे | बुध्द ने कहा – ‘ अब वक्त आ गया है की मंदिर आदमी के भीतर बने ,वक्त आ गया है की अब आदमी मंदिर बने | अब ईट पत्थर के मंदिर से काम नहीं चलेगा , निश्चित ही मनुष्य को भगवान बनाया है ,मनुष्य को भगवान होने की संभावना दी |

मनुष्य को कहा – भगवान कही और नहीं ,तेरे ही भीतर छिपा है ,उसे प्रकट होना है | ठीक भूमि है ,जल सींच ,सुरक्षा कर , सूरज की किरणों को पड़ने दे , मेघ बरसे तो छिप मत , खुला रख , अनुकूल समय पर , सम्यक ऋतू में तेरा फूल खिलेगा , तू मिटेगा ! भगवान होगा , इसीलिए तो भगवान बुध्द कहते रहे है की – भगवान नहीं , फिर भी उनको प्रेम करने वाले लोग उन्हें भगवान कहते रहे है और बुध्द ने एक भी जगह इंकार नही किया की मुझे भगवान मत कहो , यह थोडा सोचने जैसा है यह आदमी कहता है की कोई ईश्वर नहीं , कोई भगवान नहीं है !!

– ओशो

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