चंद अल्फ़ाज़ हर किताब के नाम ! Poem on Value of Books Hindi

इस डिजिटल दुनिया के जितना
नज़दीक जा रहे हैं , बहुत कुछ है जो
उतना ही दूर हो रहा है हमसे।
उनमें से एक है हमारी सबसे प्रिय मित्र …..किताब
समर्पित है चंद अल्फ़ाज़ हर किताब के नाम…
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वो खुशबू पन्नों की, वो नशा किताब का..
फूल गुलाब का वो, वो सफ़ा किताब का..

वो हाथ में उठाने का , गोद में बिछाने का..
वो सीने से लगाने का , मज़ा किताब का..

वो आरामकुर्सी वो सुनहरी धूप ,,
वो चाय के साथ ज़ायका किताब का…

खुली हवा में सांस लेने दो लफ्ज़ों को,,
अलमारी में दम घुट रहा किताब का..

हर शख्स खुद लापता सा नज़र आता है,,
किस से पूछूँ मैं पता किताब का…

जिस रुख़ से भी पढ़ोगे जान जाओगे तुम,,
क्या कह रहा है चेहरा किताब का…

कागज़ों में दब कर मर रहे हैं लफ़्ज़,,
कहाँ खो गया है दीवाना किताब का..

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