तेरे करीब आ गया हूँ ! लव गजल

कैसे-कैसे मैं तेरे करीब आ गया हूँ.
दोस्ती से चाहत के करीब आ गया हूं.

मुझ में आ गया है हुनर तुझ में फना होने का.
इश्क की कलमा पढ़ नसीब आ गया हूँ.

हो गया हूं रकीब तेरे शहर के करीब का.
नजीर घर से कोसों दूर हो गया हूं.

आती नहीं मुझ में हुनर तुझसे सजदा के लिए.
बताने की कोशिशों में गमजदा हो गया हूं.

कल जब मिली थी हमसे हल्की सी मुस्कुरा कर.
लगा मैं अपने खुदा के करीब आ गया हूं.

चल आज मेरे रूहों को मुझ से आजाद कर दें.
मैं तेरी चाहत में दोज़ख़ के करीब आ गया हूं.

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Awadhesh Kumar Rai
Awadhesh Kumar Rai
I'm journalist Freelancer belongs to dhanbad. Associated to blog writer.
Poetry, current affairs

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