हद से ज्यादा प्यार भी बर्बाद कर सकता है आपका रिश्ता

रिश्ते मुट्ठी में बंद रेत की तरह होते है ,जोर से पकड़ो तो भी फिसलेगी और ढीली करो तब भी | यही संतुलन रिश्तो की नींव होता है …

रिश्तो में प्यार बहुत ही जरुरी होता है जब आप भी किसी से प्यार करते है तो बदले में आप भी प्यार की उम्मीद करते है | यह उम्मीद मुश्किल में डाल सकती है क्योंकि इसकी को सीमा नहीं नहीं होती है | यह दबाव में तब्दील हो जाए तो रिश्तो में खटास आ जाती है |

स्नेह – प्रेम में फर्क समझे –

इस बात का फर्क जानना बहुत ही जरुरी है की आप सामने वाले से प्यार करते है या वह सिर्फ अच्छा लगता है | किसी से बात करना पसंद होना एक बात है ,लेकिन उसकी परवाह करना जरुरी है | जब आप किसी रिश्ते में होते है तो वहां उम्मीदे खुद ब खुद बंध जाती है इसका अर्थ यह नहीं है की वह हर वक्त आपके बारे में ही सोचता रहे | प्रेम बांधने से दूर होता है इस बात को जितना जल्दी समझ लिया जाए उतना बेहतर है |

हर वक्त जताना जरुरी नहीं-

प्यार व्यक्त करना ,अहसास कराने तक हो ,तो अच्छा ,लेकिन समय –समय पर हर वक्त रट लगाए रहने से यह चिढ का रूप ले लेता है और सामने वाला दूरियां बनाने लगता है | जताने वाले के मन में असुरक्षा की भावना हो सकती है | सही प्रतिक्रिया न मिलने पर उसे लगता है की रिश्ते में पहले सी गर्माहट नहीं है तो वह और असुरक्षित महसूस करने लगता है |

रिश्ते को भी साँस लेने दे –

हक जताना अपनेपन की  निशानी है ,लेकिन हद से ज्यादा हक जताने से घुटन होने लगती है | एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति की व्यक्तिगत जिन्दगी में जरुरत से ज्यादा दखल देने लगता है या उसे अपने काबू में करने की कोशिश करने लगता है तो दूरियां बढना लाजमी होता है | जैसे – कब कहाँ जाना चाहिए ,कैसे दोस्त बनाए या किन से बात करे और किन से नहीं |

 

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