महावीर जयंती 2018- भगवान महावीर का जीवन परिचय

भगवान महावीर जयंती  और जीवन का इतिहास Vardhamana Mahavira Life History Hindi

भगवान महावीर का जन्म ५९९ ई.पू. में बिहार राज्य में वैशाली के पास कुण्डिनपुर ग्राम में चेत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था | उनके पिता क्षत्रिय वंश के थे, पिता का नाम सिद्धार्थ एवं माता का नाम त्रिशला था | तीस वर्ष तक वे घर में ही रहे , उसके बाद बारह वर्ष तक घोर तपस्या करने के बाद जब उनको ज्ञान हुआ ,तो उन्होंने तीस वर्ष तक भारत –भ्रमण कर अहिंसा और सत्य का प्रचार किया | वे एक महान विचारक एवं उपदेशक थे | उन्होंने समाज में रहकर प्राणी को पांच अणुव्रत रखने को कहा – अहिंसा , सत्य , अचोर्य ,बरह्मचर्य और अपरिग्रह | भगवान महावीर की जयंती को पर्व के रूप में मनाया जाता है |

भगवान महावीर ने सर्वप्रथम यह उपदेश दिया – जिओ और जीने दो अर्थात इस धरती पर जितने भी प्राणी है ,सबको जीने का समान अधिकार है | बारह वर्ष तक घोर तपस्या करके भगवन महावीर को भी उसकी कष्ट की अनुभूति हुई ,उन्हीने अनुभव किया की दुनिया में यदि कोई धर्म है तो केवल “अहिंसा परमो धर्म ” ही है | इसी को बाद में मौर्य सम्राट अशोक और महात्मा गाँधी ने अनुसरण करके सारे संसार को बताया की अहिंसा ही सबसे बड़ी शक्ति है एवं सबसे बड़ा धर्म है |

एक समय था जब पशुओ की बलि दी जाती थी तो उस समय ही भगवान महावीर ने अहिंसा धर्म की प्रतिष्टा करके अनेक जीवो की हिंसा से रक्षा की ,इसीलिए उनकी जयंती को जीव के कल्याण का महापर्व माना जाता है |

भगवान महावीर ने सर्वधर्म समभाव का उपदेश दिया | उनके समय में विभिन्न प्रकार के मत प्रचलन में थे , जो एक दुसरे को नीचा दिखाने के लिए आपस में लड़ा करते थे | इसलिए महावीर ने सबसे सर्वधर्म को अपनाने को कहा और अनेकांतवाद के सिधांत को जन्म दिया | उन्होंने कहा की आग्रह ही लड़ाई की जड़ है ,अत: सभी धर्मो को आदर करना चाहिए |

यदि हम भगवान महावीर के बताए हुए मार्ग पर चले तो समाज , देश ही नहीं ,विश्व क कल्याण होगा | बहतर वर्ष की अवस्था में महावीर ने अपना अंतिम उपदेश दिया और निर्वाण को प्राप्त हुए | उनका निर्वाण कार्तिक कृष्ण अमावस्या को मल्ल्गण की दूसरी राजधानी पावा ( कुशीनगर से १२ मील दूर देवरिया ) जिले में हुआ |

Sharing is caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *