क्या है सौन्दर्य की परिभाषा !

संसार के सभी महान कार्य और महान कृतियों का सृजन एकांत में ही हुआ है इसलिए अपने जीवन में कुछ समय प्रतिदिन एकांत –चिंतन के लिए अवश्य बिताए | कितना समय व्यर्थ के बकवाद ,परनिंदा ,दोषदर्शन में नष्ट किया है ? वासना के कुचक्र में पडकर आप क्या करते रहे है ? सौन्दर्य बाहर कहाँ ढूंढ़ते फिर रहे हो ?  अपने ह्रदय को टटोलो ,जरा देखो तो सही उसमे कितना सुन्दर प्रेम का रस भरा हुआ है , अन्यथा मनुष्य है क्या ? मुट्टी भर हड्डीयों का ढांचा मात्र !

सौन्दर्य क्या है ? What Is the Real Definition of Beauty? 

सुन्दरता वह है, जिसे त्यागना संभव नहीं है जिसे तुम छोड़ न सको ,वही सुन्दर है | कुछ समय बाद जिसका त्याग कर दिया अथार्त वह सुन्दर नहीं रहा | परन्तु शुद्ध चेतन्य इसके विपरीत है ,जिसकी सुन्दरता निरंतर है | सौन्दर्य वस्तु में नही चेतना व् शक्ति में होती है | जहाँ चेतना है ,वही सुन्दरता है | चेतना के बगैर कितना भी सुन्दर कोई शरीर हो ,वह तो शव है और शव से कौन प्रेम करता है ? शव आकार और रूप में कितना भी विशाल व् भव्य हो परन्तु अब वहाँ चेतन्य नहीं है | पूर्व में उसमे कितना भी प्रेम और आकर्षण रहा हो ,परन्तु वहाँ से चेतन्य चला गया | शव के साथ कौन क्या करेगा ? उसका स्पर्श भी कोई नहीं करना चाहेगा | कहने का तात्पर्य है की कही भी सौन्दर्य का कारण चेतन्य ही तो है | आकर्षण चेतन्य का है उसके प्रति आसक्ति के कारण तुम उस पर हावी होना चाहते हो , उसके स्वामी बनना चाहते हो ,परन्तु ऐसा करते ही सुन्दरता नष्ट होकर मलिनता में परिवर्तित हो जाती है जिसके फलस्वरूप राग द्वेष ,झगड़ा –कलह आदि शुरू हो जाते है |

“फुल को देखो ,ह्रदय से उसकी सुन्दरता को समर्पित

हो जाओ ,उस पर अधिकार मत जमाओ ”

किसी वस्तु को देखने पर उस वस्तु को बनाने वाले की तरफ दृष्टी जाना बुद्धिमानी है | कुम्हार के बिना घड़ा ,चित्रकार के बिना चित्र नहीं बनता | पुत्र –पिता की परमपरा को देखे तो आखिरी पिता कौन है ? जब आप लकड़ी का बना हुआ खिलौना –हाथी देखते है और उसे हाथी मानते है | उस खिलोने ने लकड़ी रूप तत्व को ढक लिया है | उसी प्रकार मूल तत्व (परमेश्वर ) को  नाम रूपों ने ढक लिया है | यह लकड़ी है ,हाथी नहीं ! यह आत्मा है शरीर नहीं ! विश्व और उसका अस्तित्व समाप्त नही होता | केवल उसका स्वरूप ,अर्थ और महत्व बदल जाता है |

तथ्य ,तत्व और सता सदा की भांति मौलिक रूप से बने रहते है , केवल दृष्टी कोण रूपांतरित हो जाता है | विश्व में एक ही पवित्रतम मंदिर है ,जिसमे अत्यंत शक्तिशाली पूर्णता की प्रतिमा स्थित है : वह सर्वानन्द मंदिर – मानव का शरीर !

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